गांजा तस्करी के दो मामलों में 5 आरोपियों को सजा, 101 किलो गांजे के केस में 12 साल की जेल

चिल्फी थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग मामलों में विशेष एनडीपीएस कोर्ट का फैसला; एक केस में 3 आरोपियों को 12-12 साल और दूसरे में 2 आरोपियों को 3-3 साल का कठोर कारावास
कवर्धा। गांजा तस्करी के दो अलग-अलग मामलों में कबीरधाम के विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने पांच आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एक मामले में ट्रक से 101.070 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था। इस केस में तीन आरोपियों को 12-12 साल की जेल और एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। वहीं, दूसरे मामले में मोटरसाइकिल की सीट में छिपाकर 11.180 किलोग्राम गांजा ले जाते पकड़े गए दो आरोपियों को 3-3 साल का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया है।
ट्रक की छत के केबिन में छिपाकर रखा था 101 किलो गांजा
पहला मामला चिल्फी थाने के अपराध क्रमांक 21/2025 का है। पुलिस ने ट्रक क्रमांक RJ 17 GC 9591 की छत के केबिन में रखी चार बोरियों से 101.070 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। इस मामले में सांवरिया वर्मा, होकम सिंह सोंधिया और कुमेर सिंह आरोपी बनाए गए थे।

विशेष न्यायालय ने तीनों को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी मानते हुए 12-12 वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
मोटरसाइकिल की सीट में छिपा रखे थे 11 किलो गांजा
दूसरा मामला चिल्फी थाने के अपराध क्रमांक 30/2024 का है। इसमें आरोपियों जैनेन्द्र सिंह चौधरी और राज लोधी की मोटरसाइकिल क्रमांक CG-10-MV-4821 की सीट में छिपाकर रखा गया 11.180 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था।
विशेष न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जब्त मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन को राज्य के पक्ष में राजसात करने का आदेश भी दिया है।
तत्कालीन थाना प्रभारी की विवेचना के आधार पर पेश हुए साक्ष्य
दोनों मामलों की विवेचना तत्कालीन चिल्फी थाना प्रभारी निरीक्षक उमाशंकर राठौर ने की थी। पुलिस के अनुसार, विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन और वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर चालान न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई गई।





